In response…
June25
In response to Suchitra’s post
सूरते हाल बयाँ ज़िन्दगी का किया
पल भर मैं जीवन के हर पल को जिया |
लिखते तो सब हैं ए मेरे दोस्त,
पर आपके कलम ने जो शिरकत की
आसुओं के जाम को पीकर,
मानो जश्ने अमृत उगल दिया |
गुलामे – ज़िन्दगी होते हैं लोग
पर आपकी ज़िन्दानशि की उस बरकत को सलाम |
उस कलम की हरेक आडी तिरछी हरकत को सलाम,
हसरते ज़िन्दगी की हर उस हसरत को सलाम |